हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका, SC ने राज्य सरकार की SLP खारिज की
हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका आया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की SLP खारिज कर दी है। इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया था।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुक्खू सरकार को बड़ा झटका! कर्मचारियों की सीनियरिटी और वित्तीय लाभ से जुड़े मामले में राज्य सरकार की SLP खारिज
इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों की सीनियरिटी एवं सेवा शर्तों से जुड़े एक्ट को खारिज कर दिया था.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 29, 2026 at 1:45 PM IST
शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. राज्य के सरकारी कर्मचारियों के सेवा लाभ और वरिष्ठता से जुड़े कानून को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. देश की शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्टेट ऑफ हिमाचल बनाम देवेंद्र कुमार और अन्य के मामले में ये फैसला सुनाया है. इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश भर्ती और सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 को रद्द करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी. इसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज़ कर दिया है.
हाईकोर्ट की फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंची थी राज्य सरकार
इसी साल 25 अप्रैल 2026 को हिमाचल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया था. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों की सीनियोरिटी एवं सेवा शर्तों से जुड़े एक्ट को खारिज कर दिया था. दरअसल हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने दिसंबर 2024 के विधानसभा शीतकालीन सत्र में हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक-2024 लाया गया था, जिसे राज्य सरकार ने पारित कर कानून बनाया. इस कानून को उच्च अदालत में चुनौती दी गई. इस पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सरकार की तरफ से बनाए एक्ट को खारिज कर दिया था.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने बनाया नया कानून
हाईकोर्ट ने देवेंद्र कुमार वर्सेस स्टेट ऑफ हिमाचल मामले में ये अहम फैसला सुनाया था. गौरतलब है कि, इससे पहले पूर्व में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य कर्मचारियों से जुड़े मामले में कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नियुक्ति की तिथि से देने का फैसला सुनाया था. लेकिन इसके बाद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इसके उलट नया विधेयक सुबह से पारित कर दिया. बिल पारित हुआ तो कर्मचारी वर्ग फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया और हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए एक्ट को रद्द कर दिया.
अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट अवधि से बढ़ा विवाद
इससे पहले प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के अनुबंध की समय अवधि अलग-अलग होने के बाद वरिष्ठता और वित्तीय लाभ को लेकर सरकारी कर्मचारी अदालत पहुंचे थे. शुरुआत में एग्रीमेंट पॉलिसी के तहत कमीशन पास कर्मचारियों को 8 साल बाद रेगुलर किया गया. इसके बाद अनुबंध अवधि को घटाकर 6 साल कर दिया गया.
बाद में इस अवधि को 5 साल किया गया था. अब 3 साल का कॉन्ट्रैक्ट पीरियड काटने के बाद कर्मियों को रेगुलर करने का प्रावधान है. भिन्न अनुबंध अवधि के खिलाफ कुछ कर्मचारी कोर्ट पहुंचे थे. इस पर हिमाचल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नियुक्ति की तारीख से भी वित्तीय लाभ देने का फैसला सुनाया था.
ये भी पढ़ें: 'सिर्फ FIR या चालान दर्ज होने से नहीं रोकी जा सकती प्रमोशन', सरकारी कर्मचारियों के अधिकार से जुड़ा HC का बड़ा फैसला
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