कृत्रिम स्वीटनर्स पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और FSSAI से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने कृत्रिम स्वीटनर्स के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उपभोक्ताओं को पैकेट पर साफ और आसान भाषा में चेतावनी दी जानी चाहिए।

सौजन्य से:- Navbharat Times
अब 100% 'नेचुरल' या 'ऑरगैनिक' वाला खेल खत्म, फूड कंपनियों पर कसा शिकंजा,उपभोक्ता प्राधिकरण ने समझाया कानून और लगाया जुर्माना
याचिका और इसका लीगल एंगल
- उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ी यह याचिका इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की ओर से दायर की गई है।
- याचिका में "राइट टू इन्फॉर्मेशन ऑफ कंज्यूमर" के सिद्धांत की बात करते हुए अदालत से मांगें की गई है कि यदि किसी खाद्य पदार्थ से संभावित स्वास्थ्य जोखिम जुड़े हों तो उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उपभोक्ताओं को पैकेट पर साफ और आसान भाषा में चेतावनी दी जाए, ताकि लोग पूरी जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें कि उन्हें इन उत्पादों का इस्तेमाल करना है या नहीं।
- याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 47 (जनस्वास्थ्य सुधार का राज्य का दायित्व) का हवाला दिया गया है। साथ ही Food Safety and Standards Act, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की गई है।
- याचिकाकर्ता का कहना है कि वैज्ञानिक शोधों के आधार पर समय-समय पर नियमों की समीक्षा आवश्यक है। इसलिए नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होना जरूरी है।
- याचिका के जरिए कहा गया है कि भारत की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन कृत्रिम मिठास वाले उत्पादों पर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराए जाएं और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर के नियमन को और मजबूत किया जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और FSSAI से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जैसा कि याचिका में दावा किया गया है कि कृत्रिम स्वीटनर्स के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। अदालत ने इस विषय पर सरकारी पक्ष जानने की आवश्यकता बताई। यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य और नियामकीय जवाबदेही से जुड़ा माना जा रहा है। फिलहाल कोर्ट ने अंतिम टिप्पणी किए बिना केंद्र और FSSAI से विस्तृत जवाब मांगा है।'Second Class Passenger' पर रोक, यात्री की पहचान किराए से नहीं गरिमा से, बोला सुप्रीम कोर्ट, रेलवे को बदलनी होगी भाषा
वैज्ञानिक रिपोर्ट और FSSAI का वर्तमान रुख
गौरतलब बात यह भी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एजेंसियों ने एस्पार्टेम (Aspartame) को संभवतः कैंसरकारी श्रेणी में रखा है, हालांकि उपलब्ध मानव साक्ष्य सीमित बताए गए हैं। दूसरी ओर FAO/WHO की संयुक्त विशेषज्ञ समिति (JECFA) ने स्वीकार्य दैनिक सेवन (ADI) 40 mg/kg शरीर वजन बनाए रखा है। भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट किया था कि FSSAI के मानक इन्हीं अंतरराष्ट्रीय जोखिम आकलनों के अनुरूप बनाए गए हैं। FSSAI का भी कहना है कि निर्धारित सीमा और शर्तों के भीतर स्वीकृत कृत्रिम स्वीटनर्स सुरक्षित माने जाते हैं। ऐसे में देखा जाए तो याचिका का उद्देश्य इन्हीं मानकों और चेतावनी प्रणाली की न्यायिक समीक्षा कराना है।APAAR ID और सुप्रीम कोर्ट का आदेश, हर छात्र और माता-पिता के लिए है जानना जरूरी, जानें पूरी बात
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय सभा के विशेषज्ञ प्रतिनिधि करेंगे 17 मसौदा कानूनों पर विस्तृत चर्चा
- कर्नाटक व पश्चिम बंगाल में चुनावी रोल से हटाए गए लाखों मतदाता: समीक्षा प्रक्रिया में देरी और अपील लंबित
- चुनाव आयोग में आंतरिक असहमति और नियुक्ति नियमों पर संवैधानिक चुनौती
- जब रेफ़री भी गलती करे: चुनाव आयोग विवाद को समझाया 7 मुख्य प्रश्नों में
- सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफ युद्ध विधवा को पुनः सेवा में लौटाया
- बैंकिंग क्षेत्र के तीन नए कानूनों के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत योजना जारी
- प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम कानून के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय योजना जारी की
- सुप्रीम कोर्ट ने ऑबसी क्रिमी लेयर निर्णय के भविष्य के प्रयोग पर जजमेंट रोक रखा

