हिरासत में मृत्यु: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, जानिए क्या है इसका मतलब?
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मृत्यु को लेकर यह स्पष्ट किया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। राज्य को यह साबित करना होता है कि हिरासत के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मृत्यु को लेकर अपने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। सूत्र: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों में राज्य की जिम्मेदारी बनती है और उसे यह साबित करना होता है कि हिरासत के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।
न्यायालय ने यह भी कहा है कि यदि हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो पीड़ित परिवार को केवल आपराधिक जांच ही नहीं बल्कि मुआवजा भी दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह सार्वजनिक कानून के तहत एक आवश्यक राहत है। हाल के रुझानों में देखा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स ने ऐसे मामलों में मुआवजे को तेजी से लागू करने पर जोर दिया है।
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