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सुप्रीम कोर्ट ने एमडीयू के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति को बरकरार रखा, डिग्री जांच का आदेश

सर्वोच्च न्यायालय ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द नहीं की, क्योंकि इस पद के लिए पीएचडी अनिवार्य योग्यता नहीं थी और उम्मीदवार ने यूजीसी‑नेट पास कर ली थी। साथ ही कोर्ट ने विश्वविद्यालय को पीएचडी की प्रामाणिकता जांचने और फर्जी पाई जाने पर पुलिस शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया।

11 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने एमडीयू के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति को बरकरार रखा, डिग्री जांच का आदेश

सौजन्य से:- jagran.com

एमडीयू के सहायक प्रोफेसर की नौकरी सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पीएचडी की डिग्री फर्जी होने ...और पढ़ें

HighLights

- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी

- हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय को डिग्री के सत्यापन का दिया आदेश

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पीएचडी की डिग्री फर्जी होने की आशंका के आधार पर रद करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी। हालांकि इसके साथ ही डिग्री के सत्यापन का आदेश भी दिया है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने हालांकि रोहतक स्थित एमडीयू को पीएचडी की डिग्री की प्रामाणिकता की जांच करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि अगर डिग्री फर्जी पाई जाती है तो विश्वविद्यालय सहायक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी और सहायक प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) उत्तीर्ण करने की अनिवार्य शर्त पूरी की है।

पीएचडी की यह डिग्री कथित तौर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने जारी की थी। एमडीयू से संबद्ध रोहतक के संत जींदा कल्याणा कालेज ने 14 फरवरी, 2018 को शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर पद के लिए विज्ञापन जारी किया था।

चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छठा प्रतिवादी (जिसके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है) सबसे अधिक योग्य उम्मीदवार के रूप में सामने आया और उसे इस पद पर नियुक्त कर दिया गया था।

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