सुप्रीम कोर्ट ने एमडीयू के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति को बरकरार रखा, डिग्री जांच का आदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द नहीं की, क्योंकि इस पद के लिए पीएचडी अनिवार्य योग्यता नहीं थी और उम्मीदवार ने यूजीसी‑नेट पास कर ली थी। साथ ही कोर्ट ने विश्वविद्यालय को पीएचडी की प्रामाणिकता जांचने और फर्जी पाई जाने पर पुलिस शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- jagran.com
एमडीयू के सहायक प्रोफेसर की नौकरी सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पीएचडी की डिग्री फर्जी होने ...और पढ़ें
HighLights
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी
- हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय को डिग्री के सत्यापन का दिया आदेश
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति पीएचडी की डिग्री फर्जी होने की आशंका के आधार पर रद करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी। हालांकि इसके साथ ही डिग्री के सत्यापन का आदेश भी दिया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने हालांकि रोहतक स्थित एमडीयू को पीएचडी की डिग्री की प्रामाणिकता की जांच करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि अगर डिग्री फर्जी पाई जाती है तो विश्वविद्यालय सहायक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी और सहायक प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) उत्तीर्ण करने की अनिवार्य शर्त पूरी की है।
पीएचडी की यह डिग्री कथित तौर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने जारी की थी। एमडीयू से संबद्ध रोहतक के संत जींदा कल्याणा कालेज ने 14 फरवरी, 2018 को शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर पद के लिए विज्ञापन जारी किया था।
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छठा प्रतिवादी (जिसके खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है) सबसे अधिक योग्य उम्मीदवार के रूप में सामने आया और उसे इस पद पर नियुक्त कर दिया गया था।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
देवेंद्रकुला वेल्लालर ने SC टैग छोड़कर सामाजिक सम्मान की मांग की

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: टिकट न होने पर भी ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

अदालत‑एडीआर सहयोग से पारिवारिक विवादों का तेज़ समाधान

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: मेरठ में 16,000‑से‑अधिक संपत्तियों पर कार्रवाई

परिवारिक विवादों में न्यायालय‑एडीआर का सहयोगी मॉडल

टिकट न मिलने पर भी 8 लाख का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी परिवार को

टिकट न मिलने पर भी मुआवजा मिलेगा: सुप्रीम कोर्ट ने 8 लाख की रक़म बहाल की

सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी ज़ोन में वाणिज्यिक कार्यवाही पर सील लगाने का कड़ा आदेश
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने चीनी‑एथेनॉल मुआवजा दावों के 103.4 अरब रियाल के मुद्दे को पूर्ण पीठ तक पहुँचाया
- सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध कॉलोनियों पर सख्त कदम, न्यायिक आयोग बनाकर ध्वस्तीकरण का आदेश
- मोदी सरकार ने OBC ‘क्रीमी लेयर’ नियम लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो साल की रियायत माँगी
- अंतर्राष्ट्रीय कानून की स्नातक ने नौकरी छोड़कर सब्जी विक्रय में रोज़ 200 किग्रा बेचना शुरू किया
- केन्द्र सरकार ने OBC क्रीमी लेयर नियम लागू करने के लिए दो साल की राहत की माँग की
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्टों में 12 जजों को स्थायी पद दिलवाया
- शरई अदालत में बढ़ते तलाक‑नफका के केस, हर महीने 30 मामले, काउंसलिंग से समाधान
- LiveLaw ने लॉन्च किया ‘ब्रेकिंग न्यूज अलर्ट’ – न्यायिक अपडेट अब तुरंत

