TMC नेता जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने दिखाया कि सभी को कानून के सामने जवाबदेह होना ही पड़ेगा
दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार किया गया था. उन पर वसूली और अन्य आरोप लगाए गए थे.

सौजन्य से:- ETV Bharat
गिरफ्तार TMC नेता जहांगीर खान को अदालत ने 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा
जहांगीर खान को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था.
Published : June 9, 2026 at 5:37 PM IST
डायमंड हार्बर (पश्चिम बंगाल): तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को यहां की एक अदालत ने पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. खान को वसूली और अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया था.
खान को सोमवार को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ़्तार किया गया था. खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली. इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने से कुछ दिन पहले से ही खान को दक्षिण 24 परगना जिले के उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं देखा गया था.
डायमंड हार्बर की एक अदालत ने सरकारी पक्ष की अपील पर, फाल्टा पुलिस थाने में खान के खिलाफ दर्ज सात प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. कलकत्ता हाई कोर्ट ने 26 मई को खान को मिला अंतरिम संरक्षण हटा दिया था. खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा पुलिस थाने में सात प्राथमिकी दर्ज की गई थीं.
बता दें कि, तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को जबरन वसूली के आरोप में उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद सोमवार को दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में आक्रोशित स्थानीय लोगों ने खान के कार्यालय में कथित तौर पर तोड़फोड़ की थी. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.
अधिकारियों ने बताया कि खान के कार्यालय में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई जिसमें भीड़ ने खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और कई कमरों में फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया.
(इनपुट-पीटीआई)
ये भी पढे़ं: TMC नेता जहांगीर खान नेपाल से गिरफ्तार, कोलकाता लाया जा रहा
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इसका मतलब क्या है
यह घटना यह दर्शाती है कि राजनीतिक नेताओं को भी कानून के सामने जवाबदेह ठहराया जा सकता है। जहांगीर खान की गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत में भेजे जाने से यह संकेत मिलता है कि कानून के तहत सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित हों। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन को मजबूती से स्थापित करता है।
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