तृणमूल कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई: ऋतब्रत बनर्जी ने फिर से दावा किया, खुद को बताया असली पार्टी
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी वर्चस्व की लड़ाई के बीच ऋतब्रत बनर्जी ने अलीपुर अदालत के आदेश का हवाला देते हुए खुद को पार्टी की 'असली और वैध' इकाई बताया। उन्होंने कहा कि 22 जून को गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति और उसके अध्यक्ष अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति ही तृणमूल कांग्रेस की एकमात्र वैध समिति है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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TMC Crisis: अदालत का आदेश दिखाकर ऋतब्रत बनर्जी ने फिर ठोका दावा, कहा- हम ही हैं असली तृणमूल कांग्रेस
Sun, 12 Jul 2026 10:33 PM IST
Pavan
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: Pavan
Updated Sun, 12 Jul 2026 10:33 PM IST
सार
ऋतब्रत बनर्जी ने 22 जून को गठित अरूप राय की अध्यक्षता वाली समिति को तृणमूल की वैध इकाई बताया। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के बैंक खातों, फंड, रिकॉर्ड और संपत्तियों पर भी अधिकार जताया। वहीं, उन्होंने तृणमूल भवन के इस्तेमाल को लेकर भी ममता बनर्जी गुट को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी वर्चस्व की लड़ाई के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए खुद को पार्टी की 'असली और वैध' इकाई बताया। अलीपुर अदालत के एक आदेश का हवाला देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि 22 जून को गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति और उसके अध्यक्ष अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति ही तृणमूल कांग्रेस की एकमात्र वैध समिति है। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कोलकाता में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ऋतब्रत ने कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ओर से दायर एक मामले की सुनवाई के दौरान अलीपुर अदालत ने स्पष्ट किया है कि 22 जून को गठित समिति ही कानूनी रूप से मान्य है। उन्होंने कहा कि अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति के अलावा कोई भी व्यक्ति या समूह खुद को तृणमूल कांग्रेस का पदाधिकारी नहीं बता सकता और न ही पार्टी के नाम पर कोई संगठनात्मक या प्रशासनिक निर्णय ले सकता है।
ऋतब्रत ने कहा कि अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होते ही उसे चुनाव आयोग को भेजा जाएगा, ताकि पार्टी की वैधता संबंधी उनके दावे को और मजबूती मिल सके। उनका कहना था कि चुनाव आयोग के समक्ष भी यही पक्ष रखा जाएगा कि 22 जून के बाद गठित समिति ही पार्टी का अधिकृत नेतृत्व है। ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी दावा किया कि अदालत के आदेश के अनुसार पार्टी के बैंक खातों, फंड, रिकॉर्ड और अन्य संपत्तियों के उपयोग का अधिकार भी केवल उनकी समिति को प्राप्त है।
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उन्होंने कहा कि अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति के अलावा कोई अन्य व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस के नाम पर पार्टी फंड का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। कोलकाता स्थित तृणमूल भवन को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच ऋतब्रत ने उस पर भी अपना दावा दोहराया। उन्होंने कहा कि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में स्थित तृणमूल भवन का उपयोग केवल उनकी समिति के सदस्य ही कर सकेंगे। यदि कोई अन्य व्यक्ति या समूह पार्टी कार्यालयों का इस्तेमाल करने या उन पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अलीपुर अदालत के आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही लड़ाई के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक हलकों की नजर अब चुनाव आयोग और ममता बनर्जी गुट की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।
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कोलकाता में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ऋतब्रत ने कहा कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ओर से दायर एक मामले की सुनवाई के दौरान अलीपुर अदालत ने स्पष्ट किया है कि 22 जून को गठित समिति ही कानूनी रूप से मान्य है। उन्होंने कहा कि अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति के अलावा कोई भी व्यक्ति या समूह खुद को तृणमूल कांग्रेस का पदाधिकारी नहीं बता सकता और न ही पार्टी के नाम पर कोई संगठनात्मक या प्रशासनिक निर्णय ले सकता है।
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ऋतब्रत ने कहा कि अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होते ही उसे चुनाव आयोग को भेजा जाएगा, ताकि पार्टी की वैधता संबंधी उनके दावे को और मजबूती मिल सके। उनका कहना था कि चुनाव आयोग के समक्ष भी यही पक्ष रखा जाएगा कि 22 जून के बाद गठित समिति ही पार्टी का अधिकृत नेतृत्व है। ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी दावा किया कि अदालत के आदेश के अनुसार पार्टी के बैंक खातों, फंड, रिकॉर्ड और अन्य संपत्तियों के उपयोग का अधिकार भी केवल उनकी समिति को प्राप्त है।
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उन्होंने कहा कि अरूप राय के नेतृत्व वाली समिति के अलावा कोई अन्य व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस के नाम पर पार्टी फंड का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। कोलकाता स्थित तृणमूल भवन को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच ऋतब्रत ने उस पर भी अपना दावा दोहराया। उन्होंने कहा कि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में स्थित तृणमूल भवन का उपयोग केवल उनकी समिति के सदस्य ही कर सकेंगे। यदि कोई अन्य व्यक्ति या समूह पार्टी कार्यालयों का इस्तेमाल करने या उन पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अलीपुर अदालत के आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही लड़ाई के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक हलकों की नजर अब चुनाव आयोग और ममता बनर्जी गुट की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।
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