मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया
मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करते हुए राज्य में समान नियम लागू करने का ऐलान किया है। इस विधेयक के तहत सभी धर्मों के लिए एक समान नियम विवाह, वसीयत और तलाक के लिए लागू होंगे।

सौजन्य से:- Jagran
'राम से लेकर रहीम तक एक समान कानून', मध्य प्रदेश में शरिया और पर्सनल लॉ के युग का अंत
मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया है, जिससे राज्य में विवाह, वसीयत और तलाक के लिए सभी धर्मों पर एक समान नियम लागू होंगे। ...और पढ़ें
HighLights
- मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित हुआ।
- राज्य में मुस्लिम पर्सनल लॉ, शरिया कानून समाप्त।
- बहुविवाह, हलाला प्रतिबंधित: लिव-इन पंजीकरण जरूरी।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद अब मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला चौथा राज्य बन गया है। मंगलवार को विधानसभा में कड़े प्रविधान वाला यह विधेयक पारित हो गया।
राज्यपाल की सहमति मिलने के बाद राज्य में अब विवाह, वसीयत और तलाक पर सभी धर्मों के लिए एक समान नियम लागू होंगे।
ध्वनि मत से पारित हुए इस विधेयक में किए गए प्रविधान के मुताबिक, राज्य में मुस्लिम पर्सनल लॉ की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
MP में नहीं चलेगा शरिया कानून
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इसके साथ ही प्रदेश में तुष्टिकरण व शरिया कानून भी नहीं चलेगा। इस विधेयक में प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए विवाह-वसीयत और तलाक के एक समान नियम है। अब एक ही विवाह मान्य होगा और हलाला को भी अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कानून बनाया गया है।
विधेयक पर चर्चा के बाद सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में ही मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम पारित कर तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को पूरे देश में प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध घोषित कर दिया था।
मोहन यादव ने आगे कहा, 'अब राम से लेकर रहीम तक सभी के लिए एक समान कानून लागू होने से मध्य प्रदेश में तुष्टिकरण और पर्सनल ला के युग का अंत होगा। एक विवाह वाला ही मध्य प्रदेश की धरती पर रह पाएगा।'
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने शरिया कानून के स्थान पर सभी नागरिकों के लिए एक समान और न्यायपूर्ण व्यवस्था लागू करने का ऐतिहासिक संकल्प पूरा किया है। इस कानून के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सदन में लगे जयश्री राम के नारे
सदन में विधेयक का विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने पुरजोर विरोध किया। वहीं, भारी हंगामे के बीच सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जय श्रीराम और जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश में राज करेगा के नारे भी लगाए। इस दौरान कांग्रेस विधायकों के आसंदी के समक्ष प्रदर्शन और नारेबाजी की। विधेयक अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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वर्ग विशेष को किया जा रहा टारगेट
कांग्रेस-विधेयक पर चर्चा की शुरुआत से पहले भोपाल मध्य से कांग्रेस के विधायक आरिफ मसूद के संशोधन प्रस्ताव पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों ( संविधान की अनुच्छेद 29) का हनन किया जा रहा है।
जब भारत सरकार यूसीसी नहीं लाई, लॉ कमीशन ने कुछ नहीं कहा तो फिर ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी कि मध्य प्रदेश सरकार को विधेयक लाना पड़ रहा है।
यह राजनीतिक एजेंडा के तहत एक वर्ग विशेष को टारगेट करने के लिए किया जा रहा है। इसे प्रवर समिति को भेजा जाए ताकि विस्तृत चर्चा हो सके।
विधेयक के पांच बड़े प्रविधान
- एक शादी का नियम (बहुविवाह पर रोक) : प्रदेश में अब कोई भी व्यक्ति पहली पत्नी या पति के जीवित रहते दूसरा विवाह नहीं कर सकेगा।
- तलाक और हलाला पर प्रतिबंध : तीन तलाक और निकाह हलाला को पूर्णतः गैर-कानूनी और दंडनीय बनाया गया है। तलाक केवल कोर्ट के जरिये कानूनी प्रक्रिया से ही मान्य होगा।
- लिव-इन का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन : लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक माह के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार के पास अनिवार्य रूप से पंजीकरण करवाना होगा।
- सरोगेसी और लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैधता : ऐसे संबंधों से पैदा होने वाले बच्चों को पूर्ण कानूनी वारिस माना जाएगा, उन्हें समाज में नाजायज नहीं कहा जा सकेगा।
यह भी पढ़ें- MP में बिना टीचर चल रहे 1900 सरकारी स्कूल, CAG रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
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