10वीं पास को नहीं मिलेगी ग्रेजुएट जॉब, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी नौकरी निर्धारित योग्यताओं के मुताबिक ही दी जानी चाहिए। उच्च योग्यता वाले व्यक्ति को कम योग्यता वाले लोगों के लिए तय नौकरी प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे योग्य उम्मीदवार को अवसर से वंचित करना होगा।

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News
10वीं की योग्यता वाली नौकरी ग्रैजुएट उम्मीदवार को नहीं दे सकते; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में मामलों के समय-सीमा में निपटाने को दिशा-निर्देश बनाने और उन्हें लागू करने का आदेश देने की मांग की गई थी।
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी निर्धारित योग्यताओं के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को ही मिलनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उच्च योग्यता वाले व्यक्ति को कम योग्यता वाले लोगों के लिए तय नौकरी प्राप्त करने की अनुमति देना योग्य और पात्र उम्मीदवार को वंचित करना है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट का एक आदेश रद्द करते हुए की। आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने अस्थायी बैंक परिचारक की सेवा बहाल करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस बात को नजरअंदाज किया कि कर्मचारी ने स्नातक होने की बात छिपाकर उस पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी जो 10वीं कक्षा तक की योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित था। सरकारी नौकरी पात्र उम्मीदवारों को निर्धारित योग्यताओं के अनुसार ही दी जानी चाहिए। जब यह पद विशेष रूप से कम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए था, तो उच्च योग्यता वाले व्यक्ति को ऐसी नौकरी देना एक पात्र उम्मीदवार को अवसर से वंचित करने जैसा होगा।
सात मेडिकल कॉलेज नहीं दे रहे छात्रवृत्ति
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशभर में सिर्फ 7 मेडिकल कॉलेज प्रशिक्षु डॉक्टरों को छात्रवृति के भुगतान नहीं कर रहे। आयोग ने शीर्ष अदालतों को बताया कि इन मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ समुचित कार्रवाई की जा रही है। जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ के समक्ष आयोग की ओर से अधिवक्ता गौरव शर्मा ने डॉ. अभिषेक यादव व अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी।
केस निपटारे संबंधी याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में मामलों के समय-सीमा में निपटाने को दिशा-निर्देश बनाने और उन्हें लागू करने का आदेश देने की मांग की गई थी। याचिका में देश की सभी अदालतों में सुनवाई टालने को नियंत्रित करने को एक समान दिशा-निर्देश तय करने की भी मांग की थी। जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए खारिज कर दिया।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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