सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, छात्र प्रदर्शन पर पुलिस को कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ नहीं छीन सकती'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और क़ानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है। छात्र प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक समान पुलिस प्रोटोकॉल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

सौजन्य से:- BBC
स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक़ किसी से छीना नहीं जा सकता'
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि शांतिपूर्ण और क़ानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और केवल आंदोलन करने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस बल के अत्यधिक इस्तेमाल का आरोप लगाने वाली याचिकाओं का उल्लेख किए जाने के दौरान ये टिप्पणियां कीं.
क़ानूनी मामलों से जुड़ी ख़बरें देने वाली वेबसाइट लाइव लॉ और बार एंड बेंच के मुताबिक़, अदालत ने आगे कहा कि पुलिस ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक समान पुलिस प्रोटोकॉल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.
सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा, "शांतिपूर्ण और क़ानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत पूरी तरह सुनिश्चित है."
"जब तक आंदोलन शांतिपूर्ण है, केवल इसलिए कि आंदोलन हो रहा है, अत्यधिक बल नहीं हो सकता. अगर कोई ज्यादती की गई है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए."
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि यह केवल दिल्ली का मामला नहीं है. प्रोटोकॉल में एकरूपता ज़रूरी है. सिर्फ़ इसलिए कि वहां आंदोलन हो रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि लाठीचार्ज किया जाए. लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अनुशासन अभिन्न है.
अदालत ने घटना के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से पेश एक वकील के कार्यवाही में शामिल किए जाने के अनुरोध को भी मंज़ूरी दे दी. जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से कहा, "किसी व्यक्ति को लगी चोट, चाहे वह पुलिसकर्मी हो या विद्यार्थी, समान रूप से चिंता का विषय है. हम यह पूछ सकते हैं कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को पर्याप्त उपकरण क्यों नहीं मुहैया कराए गए... उनके पास हेलमेट होने चाहिए थे."
सभी याचिकाओं पर कल एक साथ सुनवाई की जाएगी.
क्या हैं आरोप
नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और परीक्षाओं में अनियमितता रोकने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में स्टूडेंट प्रोटेस्ट आयोजित किए गए.
इस दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों पर आरोप लगे कि उन्होंने आंदोलनकारी विद्यार्थियों पर बल का दुरुपयोग किया, जिसमें कई छात्र-छात्राएं घायल हुए.
सोशल मीडिया पर लोगों ने ऐसे कई वीडियो शेयर किए, जिनमें पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों और भीड़ के बीच मारपीट दिखी.
हालांकि, दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, छात्रों और पुलिस के बीच हुई मारपीट में सुरक्षा बलों के भी कई जवान घायल हुए थे.
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटनाएं बेहद परेशान करने वाली हैं. असहमति जताने का अधिकार सभी को है. लेकिन हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए."
दिल्ली पुलिस ने अपने इस पोस्ट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया है. इसमें दिख रहा है कि भीड़ एक पुलिस वाले की पिटाई कर रही है.
वहीं विपक्षी दलों ने भी पेपर लीक और छात्रों से निपटने के लिए पुलिस के तौर तरीकों पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाए.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाए कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर पैलेट गन तक चलाई और 'पुलिस बर्बरता' का हवाला देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग भी की.
कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं समेत कई विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार पर आरोप लगाए. इस सबको देखते हुए संसद का ये सत्र हंगामाख़ेज हो सकता है.
स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपने पहले के बयान के बारे में क्या बोले थे जस्टिस सूर्यकांत
पिछले सप्ताह बुधवार को भारत के कई समाचार माध्यमों में ख़बर प्रकाशित हुई कि 'सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया था.'
बार एंड बेंच के हवाले से दी गई ख़बरों के मुताबिक़, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक वकील की याचिका पर कहा, "अपना समय बर्बाद मत कीजिए और हमारा समय भी बर्बाद मत कीजिए."
इसके बाद सीजेआई ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस मामले में मीडिया की रिपोर्टिंग ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और लापरवाह थी.
उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने छात्र विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ दायर याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था.
लाइव लॉ के मुताबिक़, सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कोई याचिका दायर ही नहीं की गई थी. उनके मुताबिक़, एक वकील ने केवल एक लिखित रिप्रेजेंटेशन के ज़रिए इसका ज़िक्र किया था.
बार एंड बेंच के मुताबिक़, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने पेश हुए वकील ने मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की मांग की.
वकील ने कहा, "पुलिस की सख़्ती के वीडियो सबूत मौजूद हैं. जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है. पुलिस बहुत सख़्ती कर रही है..."
हालांकि, इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "कृपया हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना भी समय बर्बाद मत कीजिए. आपका समय हमारे समय से ज़्यादा क़ीमती है."
इसके बाद वकील ने कहा कि कुछ अहम मांगें उठाई जा रही हैं. इनमें सरकार से नीट को निष्पक्ष तरीक़े से कराने और बार-बार पेपर लीक होने के कारण राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को ख़त्म करने की मांग शामिल है.
बुधवार को की गई सीजेआई की इस टिप्पणी को कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था और इस पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी थी.
लाइव लॉ के मुताबिक़, शुक्रवार (24 जुलाई) को सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "पिछले दो दिनों में पूरी तरह ग़लत बयान फैलाया गया कि मामला दायर किया गया था और मीडिया ने बिना ज़िम्मेदारी निभाए यह रिपोर्ट किया कि मुख्य न्यायाधीश ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया."
"आज सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दाखिल नहीं किया गया था. केवल एक प्रतिनिधित्व भेजा गया था, जिसे किसी मिश्रा या किसी अन्य व्यक्ति ने भेजा था. मैं उस प्रतिनिधित्व को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? इसके बावजूद लोग लापरवाही से रिपोर्टिंग करने लगे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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