सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आरोपी को जेल में रखने के बाद मुकदमा खींचने की छूट नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामले में कर्नाटक सरकार की प्रॉसिक्यूशन स्कीम पर सवाल उठाए और कहा कि आरोपी को वर्षों तक जेल में रखने के बाद मुकदमा खींचने की सुविधा राज्य को नहीं दी जा सकती। मामले में 707 गवाह हैं और आरोपी शाहिद खान 2022 से हिरासत में है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामले में कर्नाटक सरकार की प्रॉसिक्यूशन स्कीम पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी आरोपी को वर्षों तक जेल में रखने के बाद मुकदमा और लंबा खींचने की सुविधा राज्य को नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने गवाहों की जांच के लिए स्पष्ट समयसीमा नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। शाहिद खान 22 सितंबर 2022 से हिरासत में है और मामले में कुल 707 गवाह हैं।
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने UAPA से जुड़े एक मामले में कर्नाटक सरकार की मुकदमा चलाने की योजना पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि अगर कोई आरोपी मुकदमा पूरा होने से पहले ही कई साल जेल में बिता चुका है तो राज्य को मुकदमा वर्षों तक खींचने की सुविधा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की योजना को बेहद अव्यवहारिक बताते हुए पूछा कि गवाहों की जांच के लिए साफ और व्यावहारिक समयसीमा क्यों नहीं बताई जा रही है।
शाहिद खान 2022 से हिरासत में, मामले में 707 गवाह
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ शाहिद खान की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। खान 22 सितंबर 2022 से हिरासत में है। उस पर आरोप है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया घानी PFI से जुड़े लोगों ने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने और उन्हें गैरकानूनी तथा हिंसक गतिविधियों में शामिल करने की साजिश रची थी। मामले में UAPA के साथ कई गंभीर धाराएं लगाई गई है। मामले में कुल 707 गवाह है।
कर्नाटक सरकार की दलील से संतुष्ट नहीं
कर्नाटक सरकार ने मुकदमे में देरी के लिए आरोपियों की ओर से दाखिल अंतरिम जमानत और डिस्चार्ज अर्जियों को भी एक वजह बताया। सुप्रीम कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ। जस्टिस बागची ने कहा कि अंतरिम जमानत की अर्जी मुकदमे की सुनवाई रोकने का कारण नहीं हो सकती। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार जांच और अभियोजन एजेसियां मुकदमा जल्दी पूरा कराने के बजाय आरोपियों की जमानत का विरोध करने में ज्यादा समय और ताकत लगाती दिखाई देती है। CJI ने निचली अदालत के एक अंतरिम जमानत आदेश का भी जिक्र किया।
'जेल में फिर एक और साल क्यों'
जस्टिस बागची ने कर्नाटक की प्रॉसिक्यूशन स्कीम पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे 'परीकथा जितनी बेतुकी योजना बताया। कोर्ट का सवाल था कि जब आरोपी पहले ही वर्षों से जेल में है, तब सरकार गवाहों की जांच के लिए एक और साल मांगने जैसी योजना कैसे दे सकती है। वह भी तब, जब यह साफ नहीं है कि मुकदमे के लिए वास्तव में कितने गवाहों की गवाही जरूरी है।
9 अन्य आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
शाहिद खान की ओर से वरिष्ठ वकील आदित्य सोधी ने कहा कि वह चार साल से अधिक समय से हिरासत में है और उसने केवल एक बार अंतरिम जमानत मांगी थी। यह अर्जी उसके ससुर की मृत्यु के कारण दाखिल की गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे नौ अन्य आरोपियों को भारतीय दंड संहिता से जुड़े मामलों में जमानत मिल चुकी है। खान को राहत देते हुए कोर्ट ने कहा कि तीन संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद वह फिर जमानत के लिए आवेदन कर सकते है।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें
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