सुप्रीम कोर्ट ने गल्फ देशों में पढ़ने वाले CBSE छात्रों की याचिका पर केंद्र और बोर्ड को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने गल्फ देशों में पढ़ने वाले CBSE छात्रों की याचिका पर केंद्र और बोर्ड को नोटिस जारी किया है, जिसमें वर्ष 2025–26 के लिए परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनाई गई विशेष मूल्यांकन नीति को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मूल्यांकन पद्धति से उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं, जिससे उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश के अवसर प्रभावित हुए हैं।

सौजन्य से:- ndtv.in
CBSE Board News : सुप्रीम कोर्ट ने गल्फ (खाड़ी) देशों में पढ़ने वाले कक्षा 12वीं के रेगुलर स्टूडेंट्स की उस याचिका पर केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नोटिस जारी किया है, जिसमें एकेडेमिक सेशन 2025–26 के लिए परीक्षाएं रद्द होने के बाद अपनाई गई विशेष मूल्यांकन (Special Evaluation) नीति को चुनौती दी गई है. जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन के CBSE से संबद्ध स्कूलों में पढ़ने वाले 30 छात्रों की ओर से वकील विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की.
याचिका के अनुसार, पश्चिम एशिया (गल्फ) क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा कारणों से वर्ष 2025–26 की CBSE बोर्ड परीक्षाओं के कई विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं. इसके बाद CBSE ने 27 मार्च 2026 को एक स्पेशल इवैल्यूएशन योजना लागू की, जिसके तहत रद्द हुई परीक्षाओं के अंक छात्रों के क्वार्टरली, हाफ-इयरली और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर तय किए गए.
हायर एजुकेशन हुई प्रभावितयाचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मूल्यांकन पद्धति से उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं, जिससे उनके उच्च शिक्षा में प्रवेश के अवसर प्रभावित हुए हैं. याचिका में कहा गया है कि 'डायरेक्ट एडमिशन ऑफ स्टूडेंट्स अब्रॉड' (DASA) और 'चिल्ड्रेन ऑफ इंडियन वर्कर्स इन गल्फ कंट्रीज' (CIWG) जैसी प्रवेश योजनाओं में पात्रता के लिए कम से कम 75 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं. कई छात्र JEE मेन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद केवल कम बोर्ड अंकों के कारण इन योजनाओं के तहत प्रवेश के लिए अयोग्य हो गए हैं.
छात्रों ने यह भी दावा किया है कि कई मेधावी विद्यार्थियों को या तो फेल घोषित कर दिया गया या कंपार्टमेंट कैटेगरी में रखा गया है, जबकि उनका पिछला रिकॉर्ड और प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है.
छात्रों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने CBSE और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. साथ ही, मामले में सहायता के लिए याचिका की कॉपी सॉलिसिटर जनरल को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
एकमुश्त ग्रेस मार्क्स दिए जाएं,याचिका में मांग की गई है कि छात्रों को एकमुश्त ग्रेस मार्क्स दिए जाएं, ताकि विशेष परिस्थितियों से हुए नुकसान की भरपाई हो सके. इसके अलावा प्रभावित छात्रों के लिए विशेष रूप से नए सिरे से सुधार परीक्षा (इंप्रूवमेंट एग्जाम) आयोजित की जाए और ‘बेटर ऑफ टू' यानी दोनों में से बेहतर अंक का लाभ उन्हें दिया जाए.
साथ ही, DASA और CIWG योजनाओं के तहत प्रवेश के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों में एक बार की छूट दी जाए ताकि छात्रों का प्रवेश सुरक्षित हो सके और उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण उनका एक बहुमूल्य साल बर्बाद न हो.
यह भी पढ़ें- भारत में डॉक्टरी का लाइसेंस लेने वाली परीक्षा FMGE इतनी मुश्किल क्यों? 88% उम्मीदवार फेल
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