राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व अदालतों में 63 साल के टलमटोल को न्याय से इनकार बताया
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्व मामलों में देरी का मतलब न्याय से वंचित होना है और 63 साल पुराना एक विवाद अभी भी फाइल पर है, जिससे अधिकारियों को तीन माह में निपटारे का निर्देश दिया गया। साथ ही अदालत ने जमानत याचिका में बताया कि ब्रेकअप और फोन ब्लॉक करना आत्महत्या का कारण नहीं बनता और अपराध स्थापित होने के लिए विशिष्ट क़ानूनी कृत्य आवश्यक है। पूर्व सरपंच पर लगाई 13.38 लाख की वसूली पर भी अंतरिम रोक लगाई गई।

सौजन्य से:- ETV Bharat
न्याय में देरी न्याय से इनकार के समान, राजस्व अदालतों पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, ब्रेकअप और फोन ब्लॉक करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व अदालत व जमानत याचिका से जुड़े मामले की सुनवाई की.
Published : September 26, 2026 at 9:39 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्व अदालतों में कई सालों से लंबित मुकदमों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए चिंता जताई है. अदालत ने कहा कि न्याय में देरी न्याय से इनकार के समान है. यह सिर्फ कहावत नहीं, बल्कि राजस्व अदालतों की वास्तविकता है. यह दुखद स्थिति है कि आधी सदी से अधिक समय तक मामलों का निस्तारण नहीं होता.
सिस्टम की लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण है 63 साल से लंबित केस: लंबित मुकदमों पर अदालत ने कहा कि वर्तमान मामला प्रणाली की उदासीनता और लापरवाही का एक ज्वलंत उदाहरण है, क्योंकि प्रकरण का निस्तारण 63 साल से नहीं हुआ है. इतने समय में पीढ़ियां बदल गईं और मुकदमेबाज मर चुके हैं, लेकिन मामला फाइल पर अभी भी जीवंत है. यह आश्चर्य की बात है कि कब्जे को लेकर दायर शिकायत का 63 साल से निपटारा नहीं हुआ है. इसके साथ ही अदालत ने एसडीएम मंडावर, दौसा को निर्देश दिए हैं कि वह लंबित शिकायत का तीन माह में निस्तारण करें. अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी पक्ष ने मामला स्थगित करने की प्रार्थना की तो उस पर कम से कम एक लाख रुपए की कॉस्ट लगाई जाएगी. अदालत ने संबंधित पीठासीन अधिकारी को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तय अवधि में मामला तय नहीं हुआ तो राजस्व मंडल व कार्मिक विभाग उचित कार्रवाई कर सकता है. जस्टिस अनूप कुमार दाधीच की एकलपीठ ने यह आदेश जयराम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.
238 बीघा भूमि से जुड़ा हुआ विवाद: याचिकाकर्ता से जुड़े अधिवक्ता कंवल सिंह लोहरा ने बताया- यह पूरा विवाद दौसा के पाटरखेड़ा गांव में 238 बीघा भूमि से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता परिवार का दावा है कि इस जमीन में उनका छठा हिस्सा है. इस जमीन पर कब्जे को लेकर करीब 63 साल पहले सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कार्रवाई आरंभ हुई थी. इसके बाद पूरी जमीन सरकारी निगरानी में चली गई और इस पर रिसीवर नियुक्त हो गया. इसके बाद से परिवार जमीन के स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है.
संबंध टूटना और फोन ब्लॉक करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा- मृतका और आरोपी एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे और उनके बीच लंबे समय तक संबंध रहे थे. घटना से पहले उनके बीच बातचीत बंद हो गई थी, आरोपी ने मृतका के फोन नंबर ब्लॉक कर दिए थे. मृतका इससे आहत थी कि आरोपी का जुड़ाव किसी अन्य महिला से है. अपनी मृत्यु से ठीक पहले बनाए वीडियो से भी मृतका की यही पीड़ा और आक्रोश झलकता है.मानवीय व्यवहार की जटिलता पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि रिश्तों में अलगाव, अस्वीकृति या ईर्ष्या के प्रति हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है. कानून हर उस परिस्थिति को दंडनीय अपराध नहीं बनाता जो किसी को गहरा भावनात्मक दुख या ठेस पहुंचाए. आपराधिक दायित्व के लिए विधिक तौर पर दोषपूर्ण आचरण का होना जरूरी है, न कि केवल नैतिक अस्वीकृति का. मामले से जुड़े अधिवक्ता डॉ. विभूति भूषण शर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना सदर में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था. निचली अदालत से जमानत नहीं मिलने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा.
पूर्व सरपंच से 13.38 लाख की वसूली पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक: राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा की ग्राम पंचायत बालाहेड़ा के पूर्व सरपंच के खिलाफ 7 अप्रैल 2026 के डिमांड नोटिस के जरिए होने वाली 13.38 लाख रुपए की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है. इसके साथ ही अदालत ने मामले में राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है. जस्टिस सुदेश बंसल ने यह आदेश पूर्व सरपंच सीताराम मीणा की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.याचिका में अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि यह मामला याचिकाकर्ता के वर्ष 2014 से 2020 के कार्यकाल के दौरान कराए गए निर्माण व विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है.
याचिकाकर्ता के खिलाफ 13 जुलाई 2026 को चार्जशीट जारी की गई, जबकि डिमांड नोटिस अप्रैल 2026 में ही दे दिया गया था. याचिका में कहा गया कि यह मामला कई साल पुराने विकास कार्यों का है, जिसकी जांच इतने सालों तक लंबित रखी गई. जब चार्जशीट के आधार पर विभागीय कार्रवाई लंबित है और अंतिम दायित्व तय नहीं हुआ है, तो वसूली उचित नहीं है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए की गई है.
एनओसी जारी करने में बाधा पैदा की जा रही: याचिकाकर्ता की देनदारी बताकर उसे एनओसी जारी करने में बाधा पैदा की जा रही है, ताकि वह चुनाव न लड़ सके. 19 मार्च 2025 की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि सुनवाई का अवसर दिए बिना और शिकायत व संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए बिना कार्रवाई आगे बढ़ाई गई, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और राजस्थान पंचायती राज प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए वसूली की कार्रवाई रद्द की जाए. इस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने वसूली पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख की लागत तय, एनएसए हिरासत को कहा 'क़ानूनी नहीं'

दिल्ली हाई कोर्ट में व्यक्तित्व अधिकार की परिभाषा पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने NSA से मल्ला अफ़रोज़ की रोकथाम को रद्द किया, यूपी सरकार पर ₹10 लाख जुर्माना लगाया

सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती, मनीषा मौत मामले में अधिवक्ता ने जवाब दाखिल; अगली सुनवाई 14 अक्टूबर

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में शामिल करने की सिफ़ारिश की

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को पैक्ड फूड चेतावनी लेबल के 365‑दिन की स्वैच्छिक अवधि पर सवाल किया

सिंगापुर की अदालत ने भारतीय आईटी वेंडर को 7 महीने की जेल, 18,000 संवेदनशील फाइलों की अनधिकृत पहुँच के आरोप
ताज़ा ख़बरें
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने FSSAI से सवाल: रिड बुल पर 'एनर्जी ड्रिंक' वर्जन से पहले क्या नोटिस दिया गया?
- सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के सोशल‑मीडिया उपयोग पर केंद्र को वैधानिक सुरक्षा व्यवस्था बनाने का आदेश
- सुप्रीम कोर्ट ने शिवार सैना के कॉर्पोरेटर रामेश माथरे का बAIL निरस्त किया, डॉक्टरों पर हमला को रोकने के लिए मजबूत सन्देश
- एनआईए की विशेष अदालत ने 'वॉइस ऑफ़ हिंद' साजिश में ISIS के चार सदस्यों को सजा दी
- लखनऊ खंडपीठ से 25 साल बाद दूसरा जज: न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित
- सुप्रीम कोर्ट ने 22 बरी आरोपीयों को नोटिस जारी, अमित शाह के डिस्चार्ज को दोबारा नहीं खोला जाएगा
- शिक्षक पर स्याही के हमले में 12 पर छह महीने की जेल
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए गहन ऑडिट का आदेश दिया

