सुप्रीम कोर्ट ने चीनी नागरिक की जमानत पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने चीनी नागरिक लियू फेंगफेई को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसे पहचान के दस्तावेजों में धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोपी है। अदालत ने मामले की जल्द सुनवाई की जरूरत पर बल देते हुए निचली अदालत को छह माह में ट्रायल पूरा करने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Hindustan
चीनी नागरिक को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा से गिरफ्तार चीनी नागरिक लियू फेंगफेई को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत को छह माह में ट्रायल पूरा करने का आदेश दिया। फेंगफेई ने अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए चीन जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन यह मांग ठुकरा दी गई।
-छह माह में ट्रायल पूरा करने का आदेश नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पहचान के दस्तावेजों में धोखाधड़ी और जालसाजी करने के आरोप में नोएडा से गिरफ्तार चीनी नागरिक लियू फेंगफेई को जमानत से इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले की जल्द सुनवाई की जरूरत पर बल देते हुए निचली अदातल को छह माह में ट्रायल पूरा करने को कहा है।
कानूनी पक्ष
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने आरोपी फेंगफेई की उस मांग को भी ठुकरा दिया, जिसमें उसने मानवीय आधार पर अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए कुछ समय के लिए चीन जाने की अनुमति मांगी थी। फेंगफेई की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल का परिवार एक असाधारण चिकित्सा आपातकाल का सामना कर रहा है क्योंकि उनकी मां गंभीर बीमारी से बीमार है और अस्पताल में भर्ती है। अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि फेंगफेई चीन के हेनान प्रांत के नानयांग शहर में अपनी बीमार मां से मिलने का इरादा रखता है।
सरकारी प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ विदेश मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने पीठ को बताया कि मामले की सुनवाई पहले से ही चल रही है और इसमें 36 गवाहों से पूछताछ की जानी है। पीठ ने इन दलीलों पर ध्यान दिया और कहा कि चूंकि मामले की सुनवाई चल रही है, इसलिए मेडिकल इमरजेंसी के आधार पर चीनी नागरिक को जमानत देना कोर्ट के लिए मुश्किल है।
अंतिम निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत और चीन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है और इस याचिका में विदेश मंत्रालय के जरिए केंद्र सरकार को एक अतिरिक्त पक्ष के तौर पर शामिल किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत सरकार को इसमें शामिल करने का मकसद सिर्फ यह पता लगाना था कि क्या कोई ऐसा तरीका निकाला जा सकता है जिससे फेंगफेई कुछ समय के लिए अपनी मां के पास रह सकें। पीठ ने कहा कि हम सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि आरोपी को जमानत पर अपनी बीमार मां से मिलने चीन जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने 24 फरवरी को जमानत देने से इनकार कर दिया था.
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