दिल्ली हाईकोर्ट के वकील कल भी न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करेंगे, बढ़ाए गए वित्तीय क्षेत्राधिकार का किया विरोध
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के खिलाफ न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही, वकीलों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में अपने केसों की सुनवाई करना बंद कर दिया है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ करने के फैसले को वकीलों ने कड़ा विरोध किया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के वकील कल भी करेंगे हड़ताल
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की आज हुई आपात बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया.
Published : July 14, 2026 at 8:37 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के वकील जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के हाईकोर्ट प्रशासन के फैसले के खिलाफ कल यानि 15 जुलाई को भी न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी रखेंगे.
आज हाईकोर्ट में हड़ताल के दौरान कुछ वकील वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए. जिसके बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन हरिहरन ने व्यक्तिगत रुप से अपील की कि वे कोर्ट में पेश नहीं हों, उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश हो रहे हाईकोर्ट के एक वकील से कहा कि भगवान के लिए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का साथ दें. तब उस वकील ने कहा कि ठीक है, हम ऑनलाइन सुनवाई से बाहर जा रहे हैं, जस्टिस नवीन चावला की बेंच ने तो यहां तक कहा कि अगर कोई वकील पेश नहीं होना चाहता है तो वे इसके लिए दबाव नहीं डालेंगे.
2 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ किया गया जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार
बता दें कि हाईकोर्ट प्रशासन ने दिल्ली के जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से हाईकोर्ट के वकीलों पर काफी असर पड़ेगा और उनके पास केसों में 70 फीसदी की कमी हो सकती है.
दरअसल, पिछले हफ्ते हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने वित्तीय क्षेत्राधिकार पर बनी सात जजों की कमेटी की रिपोर्ट को फुल कोर्ट के समक्ष रखने से रोकने की मांग खारिज कर दिया था. इस कमेटी ने जिला अदालतों के वित्तीय क्षेत्राधिकार को दो करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ करने की सिफारिश की थी जिसे फुल कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी. इसके पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 25 मई को वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव के विरोध में न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था.
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार बढ़ाने से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के प्रैक्टिस औऱ उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. इसका न्याय वितरण प्रणाली पर काफी गहरा असर होगा.
बता दें कि इसके पहले दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकीलों ने इसी सवाल को लेकर 14 मई को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया था. जिला अदालतों में न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का आह्वान ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने किया था.
ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-आर्डिनेशन कमेटी ने दिल्ली की जिला अदालतों का वित्तीय क्षेत्राधिकार दो करोड़ से बढ़ाकर बीस करोड़ करने की मांग की थी. इस मांग पर को-आर्डिनेशन कमेटी की हाईकोर्ट प्रशासन से बात भी हुई थी जिसके बाद उन्होंने 14 मई के बाद आगे न्यायिक कार्यों के बहिष्कार को खत्म कर दिया था, अब इस सवाल पर वकीलों के दोनों संगठन आमने-सामने हैं.
ये भी पढ़ें-
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट बार में चुना गया डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा, गोपालगंज को मिली सम्मानित पहचान

कुसीयारगांव में विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित विधिक जागरूकता शिविर

सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकती है जम्मू‑कश्मीर के राज्य दर्जे पर सुनवाई

दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट जजों की गिनती भूलने का आरोप लगाया

सीईसी की आजीवन प्रतिरक्षा: जवाबदेही से दूर एक खतरनाक कदम

लाइक्स की चाह में सड़क पर स्टंट करने वाले नाबालिग को नहीं मिली जमानत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सत्र न्यायालय का आदेश बरकरार रखा

2000 से अधिक नागरिकों ने CJI से SIR प्रक्रिया पर स्वयं‑मोटु कार्यवाही की मांग की

शिवहर में निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए जागरूकता अभियान
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट में यूपीआई‑एमडीआर को चुनौती का मुक़दमा
- सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट न्यायाधीशों का जाल: दुश्यंत दवे का खुलासा
- सुप्रीम कोर्ट में 2000 रुपये से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर की वैधता पर सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से ऊपर के UPI लेन‑देनों पर 0.4% शुल्क को लेकर याचिका पर सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट ने 0.4% यू.पी.आई. व्यापारिक लेनदेन शुल्क को चुनौती देने वाले याचिका पर सुनवाई तय की
- हिंदू परिवार की सहदायिक संपत्ति में बेटियों को मिलता है बराबर हिस्सा
- दुमका लोक अदालत में छह विवादों का निपटारा, 81.32 लाख की समझौता राशि तय
- कोडरमा की लोक अदालत ने 16 मामलों का निपटारा, 15.58 लाख रुपये की समेट

