गुरुग्राम पुलिस पर साकेत कोर्ट की कठोर फटकार, परिवार से अंतिम संस्कार का अधिकार छिनने पर सवाल
साकेत कोर्ट ने युवराज सिंह मनचंदा के शव निस्तारण में लापरवाही और परिवार को अंतिम संस्कार से वंचित करने के कारण गुरुग्राम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने शव की जानकारी में देरी, साक्ष्य की असुरक्षित रख‑रखाव और विरोधाभासी पोस्टमार्टम रिपोर्टों पर सवाल उठाए, तथा आगे की सुनवाई का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Jagran
युवराज मनचंदा हत्याकांड: 'परिवार से अंतिम संस्कार का अधिकार छीना', अदालत ने गुरुग्राम पुलिस को लगाई फटकार
साकेत कोर्ट ने युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में शव के निस्तारण और जांच प्रक्रिया को लेकर गुरुग्राम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है।
HighLights
- कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को शव निस्तारण में लापरवाही पर फटकारा।
- परिवार को विधि-विधान से अंतिम संस्कार के अधिकार से वंचित किया गया।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विरोधाभास और विसरा सुरक्षित न रखने पर सवाल।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। एक नामी रियल्टी कंपनी में सेल्स मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में शव के निस्तारण और जांच प्रक्रिया को लेकर शनिवार को साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने बादशाहपुर थाने के पुलिस अधिकारी से शव बरामद होने से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक की कार्रवाई पर एक-एक कर कड़े सवाल किए।
अंतिम संस्कार करने का अधिकार छीना
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अपना भाई खोया और शव का इस तरह अंतिम संस्कार किए जाने से परिवार से विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी छिन गया। बता दें कि कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले भी नाराजगी जताई थी।
जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल
वहीं, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे पहले अज्ञात शव की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल किया। अदालत ने पूछा कि अज्ञात शव मिलने के दूसरे दिन ही कार्यकारी मजिस्ट्रेट या एसडीएम को पंचनामा कार्रवाई की सूचना देना सामान्य प्रक्रिया है, फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया।
कोर्ट ने जिप नेट पर शव की जानकारी अपलोड करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाया। जिप नेट दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों की पुलिस के बीच अज्ञात शव और गुमशुदा लोगों की जानकारी साझा करने का नेटवर्क है।
शव 10 सितंबर को बरामद हुआ
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, युवराज का शव 10 सितंबर को बरामद हुआ था, जबकि परिवार की ओर से अदालत में आरोप लगाया गया कि शव का विवरण और फोटो 16 सितंबर को जिप नेट पर अपलोड किए गए। वहीं 14 सितंबर को ही शव का अज्ञात के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
युवराज की बहन हरसिमरन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने दलील दी कि अंतिम संस्कार स्थल से जली हुई घड़ी और कड़ा बरामद हुआ। इस पर अदालत ने पुलिस से शव के साथ सामान जलाए जाने को लेकर सवाल किया।
कोर्ट ने कहा कि शव के साथ मौजूद सामान को सुरक्षित रखा जाना चाहिए था। अदालत ने पुलिस की इस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर भी नाराजगी जताई।
कोर्ट ने शव से बरामद सामान को सुरक्षित रखने और उसकी कस्टडी को लेकर भी सवाल किए। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
एक रिपोर्ट में गोली, दूसरी में डूबने से मौत
कोर्ट ने पूछा कि पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी क्यों नहीं हुई। साथ ही दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर पर भी सवाल किया गया। एक रिपोर्ट में गोली लगने के निशान का उल्लेख है, जबकि दूसरी में मौत का कारण जीवित अवस्था में पानी में डूबने से दम घुटना बताया गया है।
कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा
अदालत ने पूछा कि ऐसी बुनियादी प्रक्रियाओं को कैसे नजरअंदाज किया गया। विसरा सुरक्षित नहीं रखे जाने पर भी कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है।
अदालत ने पुलिस अधिकारी के जवाबों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उसके पास सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है।
पुलिस के मुताबिक, मामले में युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके लिव इन पार्टनर संयम सचदेवा आरोपी हैं।
यह भी पढ़ें- बिना पहचान शव का अंतिम संस्कार क्यों? युवराज मनचंदा केस में गुरुग्राम पुलिस पर भड़का कोर्ट; रिपोर्ट तलब
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